श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन की सरल एवं संपूर्ण विधि मन्त्रों के साथ - (षोडशोपचार )
किसी भी पूजन को विधिवत करने की प्रक्रिया उनके मन्त्रों सहित यहाँ दी गयी है। उदहारण के तौर पर यहाँ कृष्ण जन्माष्टमी के पूजन को किया गया है। परन्तु इसी विधि से आप कोई भी पूजन अपने घर पर कर सकते हैं। केवल विशेष देव पूजन वाले चरण में मंत्र उसी देव-देवी के अनुसार बदल जायेंगे।
विशेष: किस पूजन को विभिन्न उपचारों यानि सेवा से किया जाता है। वैदिक विधि में अनेक प्रकार की उपचार सेवा का उल्लेख है जो नीचे बताएं गए हैं :
त्रयोपचार (3): गंध, पुष्प और नैवेद्य।
पंचोपचार (5): गंध, पुष्प, धूप , दीप और नैवेद्य।
दशोपचार (10): इसमें पंचोपचार के साथ पाद्य, अर्घ्य, आचमन, मधुपर्क और स्नान जुड़ जाते हैं।
षोडशोपचार (16): आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा/आरती, नमस्कार/प्रदक्षिणा।
द्वादशोपचार (12): साप्ताहिक अनुष्ठानों के लिए।
राजोपचार/द्वात्रिंशोपचार (32): अत्यधिक विस्तृत पूजा विधि।
चतुषष्टी उपचार (64): आमतौर पर बड़े मंदिरों में देवी-देवताओं के लिए की जाने वाली सेवा।
अष्टोत्तर (108) या मानस पूजा: जिसमें केवल मानसिक रूप से पूजा की जाती है।
इनमे पंचोपचार व षोडशपचार सर्वाधिक लोकप्रिय है। इस आर्टिकल में हम षोडशोपचार विधि को करेंगे।
षोडशोपचार (16) विधि संक्षेप में :
आवाहन (Avahanam): देवता को आमंत्रित करना।
आसन (Asanam): विराजमान होने के लिए स्थान देना।
पाद्य (Padyam): चरण धोना।
अर्घ्य (Arghyam): हाथ धोने के लिए जल।
आचमन (Achamanam): पीने या कुल्ला करने के लिए जल।
स्नान (Snanam): शुद्ध जल या पंचामृत से स्नान।
वस्त्र (Vastram): कपड़े अर्पित करना।
यज्ञोपवीत (Yagnopavitam): जनेऊ देना।
गंध (Gandham): चंदन लगाना।
पुष्प (Pushpam): फूल चढ़ाना।
धूप (Dhupam): धूप दिखाना।
दीप (Dipam): दीपक दिखाना।
नैवेद्य (Naivedyam): भोजन का भोग। इसमें ऋतुफल यानि सीज़नल फल भी दिए जाते हैं
ताम्बूल (Tambulam): पान-सुपारी भेंट करना।
दक्षिणा/आरती (Dakshina/Arati): दान देना और कर्पूर आरती।
नमस्कार/प्रदक्षिणा (Namaskaram/Pradakshina): प्रणाम करना और परिक्रमा।
आइये अब पूजन विधि प्रारम्भ करते हैं -
किसी भी पूजन में प्रारंभिक चरण -
आचमन :
विधि : एक अलग छोटे पात्र व चम्मच (तामड़ी ) में अपने लिए आचमन के लिए जल रखें। देव-देवी के आचमन, अर्घ्य व स्नान का जल अलग पात्र में रखे।नियमानुसार लोहे या स्टील के पात्र पूजन में व्यवहार नहीं किये जाते हैं। ताम्र यानी तांबे के पात्र अधिकांश उपयोग में लाये जाते हैं। उनके अभाव में पीतल के पात्र भी उपयोग कर सकते हैं।
(दाहिने हाथ के तर्जनी (forefinger) को मोड़कर बंद कर लें और हथेली में चम्मच से कुछ बूँद जल लेकर एक एक मंत्र बोल कर जल पीयें तथा माथे पर लगाएं )
-ॐ केशवाय नमः | - (जल पीयें तथा माथे पर लगाएं )
-ॐ नारायणाय नमः | - (जल पीयें तथा माथे पर लगाएं )
-ॐ माधवाय नमः | - (जल पीयें तथा माथे पर लगाएं )
(हस्त प्रक्षालन - (अब ये दोनों मंत्र बोलकर दो बार हाथ धोएं और अंगूठे से होंठों को साफ़ करें )
ॐ हृषिकेशाय नमः ॐ गोविन्दाय नमः ||
बाह्य व आतंरिक शुद्धि मंत्र :
विधि: किसी भी एक पुष्प को पात्र (देव-देवी वाला ) में रखे जल से भिगो कर मन्त्र पढ़ कर पूजन की हर सामग्री पर तथा अपने ऊपर जल छिड़कें
अपवित्र पवित्र उवा सर्वावस्थां गतो अपि वा
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर शुचिः ||
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु -(पूजन की हर सामग्री पर तथा अपने ऊपर जल छिड़कें )
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु -(पूजन की हर सामग्री पर तथा अपने ऊपर जल छिड़कें )
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु माम् -(पूजन की हर सामग्री पर तथा अपने ऊपर जल छिड़कें )
आसन शुद्धि:
विधि: एक पुष्प लेकर नीचे लिखे मन्त्र को पढ़ें तथा उसके बाद जिस आसन पर आप बैठें हो उसके सामने वाले हिस्से के नीचे पुष्प रख कर आसान से ढक दें
ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता
त्वं च धारय माम् देवि पवित्रम् कुरु चासनम् ||
(जिस आसन पर आप बैठें हो उसके सामने वाले हिस्से के नीचे पुष्प रख कर आसन से ढक दें)
स्वयं का चन्दन तिलक :
विधि: पूजन से पहले स्वयं का चन्दन तिलक अनिवार्य होता है। पूजन से पहले ही श्वेत व रक्त (सफ़ेद और लाल ) चन्दन घिस कर रखे। चन्दन को पानी के साथ पत्थर पर घिसने की परंपरा है। और ये भी परंपरा है की चन्दन को पतला यानि जो पानी की अधिकता से बह जाए नहीं बनाना चाहिए। बल्कि थोड़ा गाढ़ा होना चाहिए।
अब अपने अनामिका से आज्ञा चक्र पर तिलक करें और ये मन्त्र साथ साथ पढ़ें- ॐ चन्दनस्य महत् पूण्यं , पवित्रं पाप नाशनम् आपदां हरतु मे नित्यं लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा ||
स्वस्ति वाचन / गणपति का ध्यान :
किसी भी मंगल कार्य से पहले स्वस्ति वाचन या गणेश जी का ध्यान पूजन आवश्यक होता है।
विशेष: यहां सवस्ति वाचन वैदिक मन्त्र है, जिसका उच्चारण केवल यज्ञोपवीत (जनेऊधारी ब्राह्मण) जिसका उपनयन संस्कार हो चुका हो वही कर सकता है। परन्तु गणपति स्मरण या ध्यान कोई भी कर सकता है। वही दिया जा रहा है।
विधि: बाएं हाथ में पुष्प व अक्षत(चावल के दाने जो टूटे हुए न हों )लेकर दाहिने हाथ से ढक कर निम्नलिखित मंत्र पढ़ें तथा गणपति को पुष्प व अक्षत चढ़ाएं.
गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥ (गणपति को पुष्प व अक्षत चढ़ाएं )संकल्प करें
किसी भी कार्य या पूजन को करने से पहले संकल्प लेना महत्वपूर्ण है। जो आपकी दृढ़ता और फल को सुनिश्चित करता है। शाश्त्रोक्त संकल्प मंत्र इस प्रकार है।
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणो द्वितीये परार्धे, श्वेतवाराहकल्पे, वैवस्वतमन्वन्तरे जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे, भारतवर्षे, आर्यावर्त्तैकदेशान्तर्गते (यहाँ अमुक के स्थान पर वर्तमान जानकारी बोलें जो किसी भी पंचांग से मिल जाती है) अमुक संवत्सरे, अमुक ऋतौ, अमुक मासे, अमुक पक्षे, अमुक तिथौ, अमुक वासरे, (अपना गोत्र) गोत्रोत्पन्नः, (अपना नाम) शर्मा/वर्मा/गुप्तो/दासोऽहं मम आत्मनः श्रुति-स्मृति-पुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं (या अपनी विशेष मनोकामना बोलें) अमुक देवस्य (जैसे- श्री गणेश, शिव आदि) पूजनं अहं करिष्ये।(अपना नाम) शर्मा/वर्मा/गुप्तो/दासोऽहं वाले भाग शास्त्रानुसार ब्राह्मण अपने नाम में 'शर्मा', क्षत्रिय 'वर्मा', वणिक 'गुप्ता' और शूद्र 'दास' का प्रयोग करें)
यदि आप विस्तृत मंत्र नहीं बोल पा रहे हैं या ना बोलना चाहें , तो अत्यंत संक्षिप्त रूप में ऐसे संकल्प ले सकते हैं:
"ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। आज (वर्तमान तिथि) मास (वर्तमान मास) को मैं (अपना नाम और गोत्र) अमुक कार्य की सिद्धि के लिए (देवता का नाम एवं व्रत का नाम ) का व्रत एवं पूजन कर रहा हूँ।"
- दीप पूजन:
दीपो ज्योति परंब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोस्तुते
घंटा पूजन :
घंटा स्थिताये गरुडायै नमः।। (पुष्प व अक्षत चढ़ाएं )शंख पूजन:
ॐ शंखायै नमः।। (पुष्प व अक्षत चढ़ाएं )
विशेष देव-देवी पूजन का चरण - श्री बाल कृष्ण पूजन
- ध्यानम्
ॐ तमद्भुतं बालकम् अम्बुजेक्षणम्, चतुर्भुज शंख गदायुधायुदम् ।
श्री वत्स लक्ष्मम् गल शोभि कौस्तुभं, पीतम्बरम् सान्द्र पयोद सौभगं ।।
महार्ह वैदूर्य किरीटकुन्डल त्विशा परिष्वक्त सहस्रकुन्डलम् ।
उद्धम कांचनगदा कङ्गणादिभिर् विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत ।।
ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं, शंख चक्र गदाधरम्।
पीतम्बरधरं देवं माला कौस्तुभभूषितम् ।।
ॐ श्री कृष्णाय नमः। ध्यानात् ध्यानम् समर्पयामि ।।
- आवाहनम्
भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करने के बाद नीचे लिखे मंत्र को पढ़ें और श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने आवाहन मुद्रा (दोनों हाथो को खोल कर हथेली को ऊपर रखकर आमंत्रण )दिखाकर, उनका आवाहन करें।
आगच्छ देवदेवेश तेजोराशे जगत्पते ।
क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तमे ।।
आवाहयामि देव त्वां वसुदेव कुलोद्भवम् ।
प्रतिमायां सुवर्णादिनिर्मितायां यथाविधि ।।
कृष्णम् च बलबनं च वसुदेवं च देवकीम् ।
नन्दगोप यशोदाम् च सुभद्राम् तत्र पूजयेत् ।।
आत्मा देवानां भुवनस्य गभों यथावशं चरति देवेषः ।
घोषा इदस्य शण्विर न रूपं तस्मै वातायहविषा विधेम ।।
श्री क्लीं कृष्णाय नमः, सपरिवार सहित, श्री बालकृष्णं आवाहयामि ।।
- आसनं
भगवान श्री कृष्ण का आवाहन करने के बाद नीचे लिखे मंत्र को पढ़ कर उन्हें आसन के लिए पांच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़ें।
राजाधिराज राजेन्द्र बालकृष्ण महीपते।
रत्न सिंहासनं तुभ्यं दास्यामि स्वीकुरु प्रभो।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आसनं समर्पयामि।।
(- तीन बार शंख बजाएं )
- पाद्य (चरण धोने के लिए जल)
भगवान श्री कृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद नीचे लिखे मंत्र को पढ़ते हुए पाद्य (चरण धोने के लिए जल) समर्पित करें।
अच्युतानन्द गोविन्द प्रणतार्ति विनाशन।
पाहि मां पुन्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । पादयो पाचम् समर्पयामि।।
- अर्घ्य
विशेष: यज्ञोपवीत (जनेऊधारी ब्राह्मण) जिसका उपनयन संस्कार हो चुका हो वे परुषसूक्त पाठ करते हुए पंचामृत, दूध, दही, घृत, मिश्री/शर्करा एवं मधु से अभिषेक करें। अन्य सभी नीचे लिखे मन्त्र से शंख में भरकर विभिन्न वस्तुओं से (दूध, दही, घी,शक्कर, मधु , चन्दन मिश्रित जल एवं शुद्ध जल से ) अर्घ्य या अभिषेक करें।
परिपूर्ण परानन्द नमो नमो कृष्णाय वेधसे।
गृहाणार्ध्वम् मया दत्तम् कृष्णा विष्णोर्जनार्दन ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। अर्घ्यम् समर्पयामि ।।
(अर्घ्य संपूर्ण होने के बाद समर्पित द्रव्य को एक अलग पात्र में निकाल लें।
- आचमनीयं (भगवान को जल अर्पित करें)
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल समर्पित करें।
नमः सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञान रूपिणे ।
गृहाणाचमनं कृष्ण सर्व लोकैक नायक ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आचमनीयं समर्पयामि ।।
- स्नानं
आचमन समर्पण के बाद ये मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएं।
ब्रह्माण्डोदर मध्यस्थैस्तिथैश्च रघुनन्दन ।
स्नापयिश्याम्यहं भक्त्या त्वं गृहाण जनार्दना ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। मलापकर्श स्नानं समर्पयामि ।।
इसके बाद एक स्वच्छ गमछा या कपडे से मूर्ति को पौंछे एवं जिस थाल पर अर्घ्य व स्नान दिया गया था उसे भी साफ़ कर लें। उसमे पुनः पुष्प व अक्षत का आसन देकर आगे के चरण पूरे करें।
- वस्त्र
नीचे लिखे मंत्र पढ़ते हुए अपनी मनपसंद वस्त्र दें. या फिर मौली के रूप में वस्त्र समर्पित करें।
ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भुनोऽस्मि राष्ट्रस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।
तप्त कान्चन संकाशं पीताम्बरम् इदं हरे।
सगृहाण जगन्नाथ बालकृष्ण नमोस्तुते।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि ।।
भगवान को आचमन दें.
- यज्ञोपवीत (जनेऊ)
वस्त्र समर्पण के बाद ये मंत्र पढ़ें और श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मी नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णदमे गृहात् ।।
श्री बालकृष्ण देवेश श्रीधरानन्त राघव ।
ब्रह्मसुत्रम्चोत्तरीयं गृहाण यदुनन्दन ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । यज्ञोपवीतम् समर्पयामि ।।
भगवान को आचमन दें
- गंध (सुगंधित द्रव्य, इत्र चंदन आदि)
ये मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ।।
कुम्कुमागरु कस्तूरि कर्पूरं चन्दनं तता।
तुभ्यं दास्यामि राजेन्द्र श्री कृष्णा स्वीकुरु प्रभो।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । गन्धम् समर्पयामि ।।
- आभरणं हस्तभूषण
निम्नलिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिए आभूषण समर्पित करें।
गृहाण नानाभरणानि कृष्णाय निर्मितानि ।
ललाट केठोत्तम कर्ण हस्त नितम्ब हस्तांगुलि भूषणानि ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आभरणानि समर्पयामि ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। हस्तभूषणं समर्पयामि ।
- नाना परिमल द्रव्य
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
ॐ अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं जयाया हेतिं परिबाधमानः ।
हस्तघ्नो विश्वा वयुनानि विद्वान्पुमान्पुमांसं परि पातु विश्वतः ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। नाना परिमल द्रव्यं समर्पयामि ।।
- पुष्प
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को पुष्प, तुलसी माला समर्पित करें।
माल्यादीनि सुगन्धीनि, माल्यतादीनि वैप्रभो।
मया हितानि पूजार्थम्, पुष्पाणि प्रतिगृह्यताम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । पुष्पाणि समर्पयामि ।।
- अंग पूजा
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए भगवन कृष्ण के अंग-देवताओं का पूजन करना चाहिए। इसके लिए बाएं हाथ में चावल, पुष्प और चंदन लेकर प्रत्येक मन्त्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से श्री कृष्ण की मूर्ति के पास छोड़ें।
ॐ श्री कृष्णाय नमः। पादी पूजयामि ।।
ॐ राजीवलोचनाय नमः । गुल्फौ पूजयामि ।।
ॐ नरकान्तकाय नमः। जानुनी पूजयामि ।।
ॐ वाचस्पतये नमः। जंघै पूजयामि।।
ॐ विश्वरूपाय नमः । ऊरून् पूजयामि ।।
ॐ बलभद्रानुजाय नमः। गुहां पूजयामि।।
ॐ विश्वमूर्तये नमः। जघनं पूजयामि।।
ॐ गोपीजन प्रियाय नमः। कटिं पूजयामि ।।
ॐ परमात्मने नमः। उदरं पूजयामि।।
ॐ श्रीकण्टाय नमः। हृदयं पूजयामि।।
ॐ यज्ञिने नमः। पार्थी पूजयामि।।
ॐ त्रिविक्रमाय नमः । पृष्ठदेहं पूजयामि।।
ॐ पद्मनाभाय नमः । स्कन्धौ पूजयामि।।
ॐ सर्वास्त्रधारिणे नमः। बाहुन् पूजयामि।।
ॐ कमलानाथाय नमः । हस्तान् पूजयामि।।
ॐ वासुदेवाय नमः । कण्ठं पूजयामि ।।
ॐ सनातनाय नमः । वदनं पूजयामि ।।
ॐ वसुदेवात्मजाय नमः । नासिकां पूजयामि ।।
ॐ पुण्याय नमः । श्रोत्रे पूजयामि ।।
ॐ श्रीशाय नमः । नेत्राणि पूजयामि ।।
ॐ नन्दगोपप्रियाय नमः। भ्रवौ पूजयामि ।।
ॐ देवकीनन्दनाय नमः। भ्रूमध्यं पूजयामि ।।
ॐ शकटासुरमर्धनाय नमः । ललाटं पूजयामि ।।
ॐ श्री कृष्णाय नमः । शिरः पूजयामि ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः सर्वांगाणि पूजयामि ।।
- धूपं
निम्न लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को धूप समर्पित करें।
वनस्पत्युद्भवो दिव्यो गन्धाढ्यो गन्धवुत्तमः ।
बालकृष्ण महिपालो धूपोयं प्रतिगृह्यताम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। धूपं आघ्रापयामि ।।
- दीपं (सामने दीप जलाकर दिखाते हुए सामने रखना)
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को दीप समर्पित करें।
साज्यं त्रिवर्ति सम्युक्तं वह्निना योजितुम् मया।
गृहाण मङ्गलं दीपं, त्रैलोक्य तिमिरापहम् ।।
भक्त्या दीपं प्रयश्चामि देवाय परमात्मने।
त्राहि मां नरकात् घोरात् दीपं ज्योतिर्नमोस्तुते ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । दीपं दूर्शयामि ।।
हस्त प्रक्षालन (हाथ धोलें )
- नैवेद्य (मिठाई, फल, प्रसाद)
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को नैवेद्य (माखन मिश्री, धनिया की पंजीरी, मिठाई आदि) समर्पित करें।
ॐ कृष्णाय विद्महे। बलभद्राय धीमहि ।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः।
निर्वीषि करणार्थे तार्क्ष मुद्रा।
अमृती करणार्थे धेनु मुद्रा ।
पवित्री करणार्थे शङ्ख मुद्रा।
संरक्षणार्थे चक्र मुद्रा ।
विपुलमाय करणार्थे मेरु मुद्रा।
ॐ सत्यंतवर्तन परिषिंचामि ।
भोः ! स्वामिन् भोजनार्थं आगच्छादि विज्ञाप्य।
सौवर्णे स्थालिवैर्ये मणिगण खचिते गोघृतां ।
सुपक्कां भक्ष्यां भोज्यां च लेह्यानपि सकलमहं
जोष्यम्न नीधाय नाना शाकैरूपेतं
समधु दधि घृतं क्षीर पानीय युक्तं तांबूलं चापि
श्री कृष्णं प्रतिदिवसमहं मनसा चिंतयामि ।।
अद्य तिष्ठति यत्किञ्चित् कल्पितश्चापरंग्रिहे
पक्वान्नं च पानीयं यथोपस्कर संयुतं
यथाकालं मनुष्यार्थे मोक्ष्यमानं शरीरिभिः
तत्सर्वं कृष्णपूजास्तु प्रयतां मे जनार्दन
सुधारसं सुविपुलं आपोषणमिदं
तव गृहाण कलशानीतं यथेष्टमुपभुज्यताम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः ।
ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा।(हस्त मुद्रा द्वारा)
ॐ प्राणात्मने नारायणाय स्वाहा। ॐ अपानात्मने वासुदेवाय स्वाहा।
ॐ समानात्मने अनिरुद्धाय स्वाहा। ॐ व्यानात्मने सङ्कर्षणाय स्वाहा।
ॐ उदानात्मने प्रद्युम्नाय स्वाहा।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः।
आखों के आगे हाथ रखकर घंटी बजाते हुए ये मंत्र पढ़ें:
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्ति मे अचलां कुरुः ।
ईप्सितं मे वरं देहि इहत्र च परां गतिम् ।।
श्री कृष्ण नमस्तुभ्यम् महा नैवेद्यं उत्तमम् ।
संगृहाण सुरश्रेष्ठिन् भक्ति मुक्ति प्रदायकम् ।।
ॐ आद्राँ पुष्करिणीं पुष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । नैवेद्यं समर्पयामि ।।
सर्वत्र अमृतोपिधान्यमसि स्वाहा ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। उत्तरापोषणं समर्पयामि ।।
- तांबूलं (पान सुपारी अर्पण)
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें।
पूगीफलं सतांबूलं नागवल्लि दलैर्युतम् ।
ताम्बूलं गृह्यतां कृष्ण येल लवंग सम्युक्तम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। पूगीफल ताम्बूलं समर्पयामि ।।
- दक्षिणा
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण जी को दक्षिणा समर्पित करें।
हिरण्य गर्भ गर्भस्थ हेमबीज विभावसोः।
अनन्त पुण्य फलदा अधः शान्तिं प्रयच्छ मे।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। सुवर्ण पुष्प दक्षिणां समर्पयामि।।
- महानीराजन (आरती)
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को निराजन (आरती) समर्पित करें।
ॐ श्रिये जातः श्रिय अनिरियाय श्रियं वयो जरितृभ्यो ददाति
श्रियं वसाना अमृतत्वमायन् भवंति सत्य स मिथामितद्रौ
श्रिय एवैनं तत् श्रियामादधाति संततमृचा वषट्कृत्यं
संतत्यै संघीयते प्रजया पशुभिः य एवं वेद ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। महानीराजनं दीपं समर्पयामि।।
- प्रदक्षिणा
अब निम्न मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण की प्रदक्षिणा (बायीं से दायीं ओर की परिक्रमा) करें और फूल अर्पित करें..
आर्द्रां यःकरिणी यष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आवह्।।
यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।
तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणे पदे पदे ।।
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।
तस्मात् कारुण्य भावेन रक्ष रक्ष रमापते।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। प्रदक्षिणान् समर्पयामि।।
- नमस्कार
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार करें।
नमो ब्रह्मण्य देवाय गोब्राह्मणहिताय च।
जगदीशाय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः ।।
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ।।
नमस्तुभ्यं जगन्नाथ देवकीतनय प्रभो
वसुदेवात्मजानन्द यशोदानन्दवर्धन
गोविन्द गोकुलादर गोपीकान्त नमोस्तुते
सप्तास्यासन् परिधयः त्रिस्सप्त समिधः कृताः ।
देवा यद्यज्ञं तन्वानाः अबवघ्नन्पुरुषं पशुम् ।।
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।।
नमः सर्व हितार्थाय जगदाधार हेतवे।
साष्टाङ्गोयं प्रणामस्ते प्रयत्नेन मया कृतः।
उरूसा शिरसा दृष्ट्वा मनसा वाचसा तथा।
पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्याम् प्रणामोष्टांगं उच्यते ।।
शात्येनापि नमस्कारान् कुर्वतः शार्ङ्गपाणये।
शत जन्मार्चितम् पापम् तत्क्षणदेव नश्यति ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। नमस्कारान् समर्पयामि।।
- क्षमापन (क्षमा मांगना)
निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीकृष्ण से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए..
अपराध सहस्राणि क्रियन्ते अहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व पुरुषोत्तम ।।
यान्तु देव गणाः सर्वे पूजां आदाय पार्थिवीम् ।
इष्ट काम्यार्थ सिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च ।।
।। श्री कृष्णार्पणमस्तु ।।






